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Operation Shivshakti: पुंछ में घुसपैठ की कोशिश नाकाम, सेना ने दो आतंकियों को किया ढेर

(फाइल फोटो)

(फाइल फोटो)

Jammu Kashmir Terrorism News: जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले में नियंत्रण रेखा (LoC) पर भारतीय सेना (Indian Army) को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है. सेना ने एक घुसपैठ की कोशिश को नाकाम करते हुए दो आतंकवादियों को मार गिराया है. यह मुठभेड़ मंगलवार (29 जुलाई) रात शुरू हुई और बुधवार (30 जुलाई) को भी जारी रही. इस पूरे अभियान को 'ऑपरेशन शिव शक्ति' नाम दिया गया है.

यह मुठभेड़ पुंछ के देगवार सेक्टर के कलसियां-गुलपुर इलाके में उस समय शुरू हुई जब सेना की चौकी पर तैनात जवानों ने देर रात दो से तीन संदिग्ध लोगों की हरकत देखी. यह घुसपैठ की कोशिश उस समय हुई जब इलाके में हल्की धुंध और अंधेरा था, लेकिन सेना की मुस्तैदी के चलते आतंकियों को आगे बढ़ने का मौका नहीं मिला.

सेना की व्हाइट नाइट कोर (16 Corps) ने एक बयान में बताया, "ऑपरेशन शिवशक्ति के तहत सतर्क जवानों ने नियंत्रण रेखा पार कर घुसपैठ की कोशिश कर रहे दो आतंकियों को मार गिराया है. तीन हथियार बरामद किए गए हैं और ऑपरेशन अभी भी जारी है." इस अभियान में जम्मू-कश्मीर पुलिस की भी अहम भूमिका रही जिन्होंने खुफिया इनपुट्स के जरिए कार्रवाई को संभव बनाया.

सेना की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पहले ट्विटर) पर भी जानकारी दी गई कि मंगलवार रात दो संदिग्धों की गतिविधि पुंछ सेक्टर में नियंत्रण रेखा के पास देखी गई थी. इसके बाद मुठभेड़ शुरू हुई और जवाबी कार्रवाई में आतंकियों को ढेर कर दिया गया.

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, शुरुआती जांच में पता चला है कि आतंकी सीमा पार से आए थे और उनके पास अत्याधुनिक हथियार थे. अभी यह स्पष्ट नहीं है कि ये आतंकी किसी बड़े आतंकी हमले की योजना में थे या सिर्फ घुसपैठ के जरिए इलाके में सक्रिय होना चाहते थे.

गौरतलब है कि इस साल सीमा पार से घुसपैठ की कई कोशिशें की गई हैं, लेकिन सेना और सुरक्षा एजेंसियों की चौकसी ने इन सभी प्रयासों को नाकाम कर दिया है. 'ऑपरेशन शिवशक्ति' इसी सतर्कता का एक और प्रमाण है.


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Written by: Raihan

30 Jul 2025  ·  Published: 07:24 IST

कौन हैं एप्पल AI के नए वाइस प्रेसिडेंट अमर सुब्रमण्या? कंपनी को बना पाएंगे सिरमौर!

अमर सुब्रमण्या

अमर सुब्रमण्या

अमर सुब्रमण्या को Apple ने अपना नया वाइस-प्रेसिडेंट (AI) नियुक्त किया है. यानी अब AI विभाग की बागडोर उनके हाथ में है. यह फैसला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि Apple इस समय अपने AI प्रोजेक्ट्स - जैसे स्मार्ट वॉयस असिस्टेंट, फाउंडेशन मॉडल्स और मशीन-लर्निंग फीचर्स  को तेजी से आगे बढ़ाना चाहता है. इस सौंपे गए दायित्व से यह स्पष्ट है कि कंपनी उन्हें भविष्य में AI के क्षेत्र में अपना सिरमौर बनाने की पूरी तैयारी कर रही है.

मार्च में कार्यभार आधिकारिक रूप से संभालने के बाद अमर सुब्रमण्या Siri के पर्सनलाइजेशन और मल्टीमॉडल कैपेबिलिटीज के साथ-साथ मशीन लर्निंग रिसर्च तथा AI सेफ्टी एंड इवैल्यूएशन जैसे क्रिटिकल एरियाज पर काम करेंगे.

दरअसल, एप्पल अब अपनी एआई रणनीति पर अमल करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है. इस बदलाव को लेकर टेक इंडस्ट्री में काफी चर्चा हो रही है. उन्होंने बैंगलोर यूनिवर्सिटी से Bachelor of Engineering (Electrical & Electronics करने के बाद अमेरिका के University of Washington से PhD in Computer Science का शोध पूरा किया. 

करियर 

PhD के दौरान और बाद में उन्होंने पहले IBM में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में काम किया. इसके बाद वे माइक्रोसॉफ्ट रिसर्च में विजिटिंग रिसर्चर रहे, जहां उन्होंने मल्टी-सेंसरी फ्यूजन, स्पीच रिकग्निशन, स्पीकर वेरिफिकेशन जैसे क्षेत्रों पर काम किया. 

अमर सुब्रमण्या ने Google में करीब 16 साल काम किया. वहां उन्होंने शुरुआत रिसर्च साइंटिस्ट की भूमिका में की, फिर प्रिंसिपल इंजीनियर और बाद में इंजीनियरिंग लीड (VP of Engineering) बने. Google में ही वे प्रमुख रूप से Gemini Assistant (Google का AI असिस्टेंट) के इंजीनियरिंग हेड थे. 

2025 में  Google छोड़कर वे कुछ समय के लिए Microsoft में शामिल हुए, जहां उन्होंने Corporate Vice President of AI की भूमिका निभाई. अब अमर सुब्रमण्या ऐप्पल में वाइस प्रेसिडेंट ऑफ AI की जिम्मेदारी मिली है. वह Apple की एआई टीम की अगुवाई करेंगे. वह कंपनी के सॉफ़्टवेयर प्रमुख Craig Federighi को रिपोर्ट करेंगे  

अमर की जिम्मेदारियां 

Foundation Models (एप्पल के AI मॉडल) का विकास और देखरेख. मशीन-लर्निंग (ML) रिसर्च और नई AI तकनीकों पर काम करना. AI सेफ्टी और एवैल्यूएशन  यानी AI का सुरक्षित और भरोसेमंद रूप सुनिश्चित करना. इसका मतलब है कि ऐप्पल अब AI को अपने अगले बड़े रणनीतिक स्तंभ के रूप में देख रहा है. खासकर तब, जब AI फीचर्स, Siri आदि में सुधार और आधुनिक AI समेकन की मांग बढ़ी है. 

नियुक्ति अहम क्यों? 

अमर सुब्रमण्या के पास रिसर्च + प्रोडक्ट इंजीनियरिंग में गहरी तकनीकी विशेषज्ञता है. Google और Microsoft दोनों में उनके अनुभव ने साबित किया है कि वे बड़े पैमाने पर AI को व्यावसायिक उत्पादों में बदल सकते हैं. इस नियुक्ति से यह संकेत मिलता है कि ऐप्पल अब AI में तेजी लाने और संभवतः अपने प्रोडक्ट्स (जैसे Siri, AI-assisted फीचर्स) को बढ़ाने की दिशा में गंभीर है. 

भारत के लिए भी यह गर्व की बात है, क्योंकि एक भारतीय मूल के AI वैज्ञानिक को विश्व की शीर्ष तकनीकी कंपनी में इतना बड़ा दायित्व मिला है. उनकी नियुक्ति न सिर्फ Apple के लिए बल्कि भारतीय टेक इंडस्ट्री के लिए भी बड़ी उपलब्धि है.


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Written by: Dhirendra Mishra

03 Dec 2025  ·  Published: 06:17 IST

Agra: मूर्ति विसर्जन के दौरान नदी में बह गए 9 नौजवान, 2 का शव मिला; SDRF का रेस्क्यू जारी

प्रतीकात्मक AI तस्वीर

प्रतीकात्मक AI तस्वीर

Agra Accident During Idol Immersion: आगरा जिले में गुरुवार (2 अक्टूबर) को विजयादशमी के अवसर पर उस समय मातम छा गया, जब उटंगन नदी में मूर्ति विसर्जन के दौरान बड़ा हादसा हो गया. नौ लोग गहरे पानी में उतर गए, जिनमें से दो लोगों की मौत हो गई और छह अन्य अब भी लापता बताए जा रहे हैं. यह दर्दनाक घटना खैरागढ़ इलाके में हुई, जिसने पूरे इलाके को सदमे में डाल दिया है.

स्थानीय लोगों के मुताबिक, विसर्जन के दौरान अचानक कई युवक तेज बहाव में बह गए. ग्रामीणों ने हिम्मत दिखाते हुए तुरंत बचाव कार्य शुरू किया और एक युवक को सुरक्षित बाहर निकाल लिया. वहीं, कुछ देर की मशक्कत के बाद पुलिस और गोताखोरों ने दो शव बरामद किए, जिनकी पहचान गगन (26 वर्ष) और ओमपाल (32 वर्ष) के रूप में हुई है.

घटना की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन और पुलिस मौके पर पहुंची. जिला मजिस्ट्रेट अरविंद मल्लप्पा बंगारी ने बताया कि छह लोग अब भी लापता हैं, जिनकी तलाश के लिए राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ), स्थानीय गोताखोर और पुलिसकर्मी लगातार अभियान चला रहे हैं. उन्होंने बताया कि प्रशासन ने मूर्ति विसर्जन के लिए पहले से ही एक सुरक्षित और तय स्थल निर्धारित किया था, लेकिन मृतक और लापता लोग नदी के किसी अन्य हिस्से में चले गए थे, जहां पानी अधिक गहरा था. इसी वजह से यह हादसा हुआ.

इधर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस दुर्घटना पर गहरा दुख जताया है. शुक्रवार सुबह मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान में उन्होंने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की और अधिकारियों को राहत एवं बचाव कार्य में पूरी तत्परता से जुटने के निर्देश दिए. मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि हादसे में घायल या प्रभावित परिवारों की हरसंभव मदद की जाएगी.

खैरागढ़ और आसपास के गांवों में इस घटना के बाद माहौल गमगीन है. लोग लगातार नदी किनारे जुटकर लापता युवकों की तलाश की खबरों का इंतजार कर रहे हैं. परिवारों का रो-रोकर बुरा हाल है और पूरा इलाका शोक में डूबा हुआ है.


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Written by: Raihan

03 Oct 2025  ·  Published: 11:08 IST

कैसे बदल गए चिराग पासवान के सुर, क्यों करने लगे नीतीश की तारीफ?

चिराग पासवान

चिराग पासवान

राजनीति में कुछ भी स्थायी नहीं मान सकते. ना दुश्मनी और ना दोस्ती. एलजेपीआर प्रमुख चिराग पासवान, जिन्होंने कभी नीतीश कुमार की नीतियों पर खुलकर हमला बोला था, अब उन्हीं की तारीफ करने लगे हैं. सवाल उठता है क्या खुद को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 'हनुमान' कहने वाले चिराग पासवान के लिए ऐसा करना सियासी मजबूरी है या चुनावी रणनीति? क्या चिराग पासवान अब एनडीए के ‘संकट मोचन’ भूमिका में दिखेंगे? 

दरअसल, चिराग पासवान ने कहा है कि इस साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनाव के बाद नीतीश कुमार फिर से बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेंगे. जबकि, हाल ही में चिराग पासवान ने बिहार की कानून व्यवस्था पर चिंता जाहिर की थी. उन्होंने कहा था कि बिहार सरकार ने अपराधियों के सामने "आत्मसमर्पण" कर दिया है. इसके बाद सीएम नीतीश की काफी किरकिरी हुई थी. विपक्ष ने भी इसकी आड़ में उन्हें निशाने पर लिया था. 

क्या कहा था चिराग ने? 

दिल्ली में मीडिया से बातचीत करते हुए बिहार के हाजीपुर से सांसद चिराग पासवान ने कहा कि एनडीए चुनावों के लिए एक "विजयी गठबंधन" है और उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई. इसके आगे उन्होंने कहा, "मैंने कई बार दोहराया है कि मेरी प्रतिबद्धता और प्यार प्रधानमंत्री के प्रति है?. प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में (बिहार में) चुनाव लड़े जाएंगे. चुनाव परिणामों के बाद नीतीश कुमार फिर से मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे. निश्चित रूप से वह मुख्यमंत्री होंगे."

कभी दुश्मन नंबर वन

केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने साल 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में 'नीतीश मुक्त बिहार' का नारा दिया था. लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) ने जेडीयू को टारगेट कर सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे और नीतीश को बड़ा नुकसान पहुंचाया.

नई केमिस्ट्री की वजह

केंद्र में मंत्री पद मिलने और LJP (रामविलास) को NDA में ‘फुल स्टेटस’ मिलने के बाद चिराग अब खुद को गठबंधन का अभिन्न हिस्सा मानते हैं. सीट बंटवारे में भी जेडीयू से टकराव टालना, उनकी रणनीति हो सकती है. दलित-पसमांदा वोटों की राजनीति में चिराग को अब नीतीश की साख का फायदा चाहिए. बिहार की राजनीति में गठबंधन के भीतर एकता दिखाना जरूरी हो गया है.

बिहार के जनीतिक विश्लेषक इसे चिराग की ‘राजनीतिक परिपक्वता’ बता रहे हैं. जहां चिराग ने विरोध की जगह सहयोग का रास्ता चुना है, लेकिन उनके आलोचक इसे अवसरवाद भी कह रहे हैं.


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Written by: Dhirendra Mishra

30 Jul 2025  ·  Published: 00:18 IST